रात में दही खाना सेहत के लिए नुकसानदेह है? भारतीय थाली में दही का एक विशेष स्थान है। चाहे रायता हो, लस्सी हो या सादा दही, हम इसे बड़े चाव से खाते हैं। इसे ‘प्रोबायोटिक’ का पावरहाउस माना जाता है जो हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। लेकिन, अक्सर आपने घर के बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि “रात में दही नहीं खाना चाहिए।” आधुनिक जीवनशैली में कई लोग इसे केवल एक मिथक मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक, ‘चरक संहिता’ में रात के समय दही के सेवन को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी गई है?
आज के इस लेख में हम गहराई से समझेंगे कि आयुर्वेद और आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान रात में दही खाने के बारे में क्या कहते हैं और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं।

आयुर्वेद का दृष्टिकोण: क्यों है रात में दही वर्जित?
आयुर्वेद के अनुसार, भोजन का चुनाव केवल उसके पोषक तत्वों पर नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति (गुण), मौसम और समय पर निर्भर करना चाहिए।
1. दही की प्रकृति (Properties of Curd):
दही स्वाद में खट्टा, तासीर में गर्म (उष्ण) और पचने में भारी होता है। आयुर्वेद इसे ‘अभिष्यंदी’ (Abhishyandi) कहता है। अभिष्यंदी का अर्थ है— ऐसा पदार्थ जो शरीर के सूक्ष्म स्रोतों (Channels) में रुकावट पैदा करता है और चिपचिपाहट बढ़ाता है।
2. दोषों पर प्रभाव (Impact on Doshas):
रात का समय प्राकृतिक रूप से शरीर में ‘कफ’ (Kapha) के बढ़ने का समय होता है। दही कफ और पित्त दोनों को बढ़ाता है। जब हम रात में दही खाते हैं, तो यह शरीर में अत्यधिक बलगम या म्यूकस (Mucus) पैदा करता है, जो कई बीमारियों की जड़ बन सकता है।
रात में दही खाने के 5 प्रमुख नुकसान
- श्वसन संबंधी समस्याएं (Respiratory Issues): रात में दही खाने से कफ दोष असंतुलित हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप आपको बार-बार सर्दी, खांसी, साइनस की समस्या या अस्थमा की शिकायत हो सकती है। जो लोग पहले से ही सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए रात का दही स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
- पाचन में भारीपन और टॉक्सिन्स: सूरज ढलने के बाद हमारी जठराग्नि (Metabolism) धीमी हो जाती है। दही जैसे भारी और फर्मेंटेड भोजन को रात में पचाना शरीर के लिए कठिन होता है। अधपका भोजन पेट में सड़ने लगता है, जिससे ‘आम’ (Toxins) बनते हैं। यही ‘आम’ भविष्य में कोलेस्ट्रॉल और मोटापे का कारण बनता है।
- जोड़ों का दर्द और सूजन: दही के ‘अभिष्यंदी’ गुण के कारण यह जोड़ों के बीच के तरल पदार्थ को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों को अर्थराइटिस या जोड़ों में दर्द की समस्या है, उन्हें रात में दही खाने से अंगों में अधिक जकड़न और सूजन महसूस हो सकती है।
- त्वचा संबंधी रोग (Skin Disorders): आयुर्वेद के अनुसार, विरुद्ध समय पर खाया गया दही रक्त (Blood) को अशुद्ध कर सकता है। रात में दही का नियमित सेवन चेहरे पर मुँहासे (Acne), खुजली या एक्जिमा जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है।
- नींद की गुणवत्ता में कमी: जब पाचन तंत्र रात भर भारी भोजन को पचाने में लगा रहता है, तो मस्तिष्क को वह आराम नहीं मिल पाता जो गहरी नींद के लिए आवश्यक है। इससे सुबह उठने पर आप थकान और भारीपन महसूस कर सकते हैं।
क्या कोई अपवाद है? (Exceptions)
आयुर्वेद के अनुसार, यदि आपको रात में दही खाना ही है, तो इसे कभी भी सादा न खाएं। इसे निम्नलिखित चीजों के साथ मिलाकर इसके दुष्प्रभाव कम किए जा सकते हैं:
- शहद के साथ: शहद दही के भारीपन को काटने में मदद करता है।
- मिश्री के साथ: यह पित्त को शांत करता है।
- घी और आंवले के चूर्ण के साथ: यह सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।
- मूंग की दाल के साथ: यह पाचन में सहायता करता है।
सबसे बेहतर विकल्प: ताजी छाछ (Buttermilk)
यदि आप रात के भोजन में कुछ प्रोबायोटिक शामिल करना चाहते हैं, तो दही के बजाय ‘छाछ’ का चुनाव करें। छाछ पचने में हल्की होती है और शरीर के स्रोतों को साफ करती है। इसमें थोड़ा भुना जीरा, हींग और सेंधा नमक मिलाकर पीने से यह पाचन के लिए ‘अमृत’ के समान काम करती है।
निष्कर्ष
स्वास्थ्य केवल अच्छा खाने में नहीं, बल्कि सही समय पर सही तरीके से खाने में है। ‘अजित आयुर्वेद’ का मिशन आपको आपके शरीर की प्रकृति से जोड़ना है। रात में दही का सेवन भले ही स्वादिष्ट लगे, लेकिन दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए यह एक समझौता है। स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेद के इन सरल नियमों का पालन करें और अपनी जठराग्नि को मजबूत रखें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। यदि आप किसी विशेष गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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