कभी हमारे गाँव–कस्बों में एक वाक्य बहुत आम था — “बदन ठंडा पड़ने लगा है, कोरामिन का इंजेक्शन दे दो!” यह आम जन की भाषा में एक तरह की आपातकालीन चिकित्सा सलाह थी। कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हुआ, ज़्यादा कमज़ोर या हाइपोथर्मिक दिखा, तो पास के वैद्य या कंपाउंडर तुरन्त कोरामिन (Coramine) का इंजेक्शन लगा देते थे। कुछ ही मिनट में शरीर में हलचल लौट आती, चेहरे पर गर्मी दिखने लगती और लोग राहत की सांस लेते।

जब बदन ठंडा पड़ने लगे: कोरामिन अब नहीं, तो क्या करें?

लेकिन अब हालत बदल चुकी है। कोरामिन (जिसे निकेथामाइड – Nikethamide के नाम से जाना जाता था) बाज़ार से लगभग गायब हो चुका है। यह पुरानी दवा अब न तो फार्मेसी में आसानी से मिलती है, न ही आधुनिक चिकित्सा में इसके उपयोग की अनुमति है। सवाल उठता है — अब इसके स्थान पर क्या किया जाए जब किसी का शरीर ठंडा पड़ने लगे या चेतना धुंधली हो?

कोरामिन क्या था और क्यों बंद हुआ?

कई दशक पहले कोरामिन का उपयोग एक respiratory and circulatory stimulant (श्वसन और परिसंचरण को उत्तेजित करने वाला) इंजेक्शन के रूप में होता था। इसका उद्देश्य था —

  • सांसों को तेज़ करना,
  • रक्तसंचार बढ़ाना,
  • शरीर के तापमान और चेतना को अस्थायी रूप से सक्रिय करना।

लेकिन समय के साथ पाया गया कि यह केवल अल्पकालिक प्रभाव देता है और ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल करने पर हृदय गति बढ़ाकर झटका या दिल की गड़बड़ी जैसे खतरे उत्पन्न कर सकता है। इसलिए आधुनिक चिकित्सा में इसे सुरक्षित नहीं माना गया और उत्पादन धीरे-धीरे बंद कर दिया गया।

अब जब कोरामिन नहीं मिलती तो विकल्प क्या?

आज के समय में सुरक्षित और सुलभ विकल्प कई हैं — बस ज्ञान और तैयारी की ज़रूरत है।

1. होश या चेतना की हानि में प्राथमिक उपचार

  • तुरंत समतल जगह लिटाएं।
  • पैरों को 6–8 इंच ऊँचा करें ताकि रक्त मस्तिष्क की ओर लौटे।
  • कपड़े ढीले करें, हवा लगने दें।
  • अगर ठंड से हालत है, तो कंबल या गर्म कपड़े से ढकें और गर्म पेय (अगर होश में हो तो) धीरे-धीरे दें।
  • सांस पर ध्यान दें — अगर बहुत कमजोर हो रही है तो mouth-to-mouth respiration (कृत्रिम सांस) शुरू करें।
  • साथ ही तुरंत मेडिकल सहायता के लिए भेजें।

2. हाइपोथर्मिया (Hypothermia) के समय

  • गर्म जगह पर लाएं।
  • गरम पानी की बोतल (कपड़े में लपेटकर) पेट, बगल या जांघों के पास रखें।
  • शरीर को बाहरी रूप से गर्म करने से पहले अंदर से गुनगुना पेय (दूध, तुलसी-काढ़ा, सूप आदि) देना मददगार होगा।
  • पुरानी देसी विधियों में अद्रक + शहद + तुलसी का काढ़ा तेज़ी से शरीर में गर्माहट लाता है।

3. रक्तसंचार उत्तेजित करने वाले आयुर्वेदिक उपाय

आयुर्वेद के अनुसार जब उष्मा तत्व (Agni-tatva) मंद हो जाता है, तो शरीर ठंडा महसूस करता है, नाड़ी धीमी पड़ जाती है। इस अवस्था में कुछ घरेलू और औषधीय उपाय लाभकारी हैं —

  • सहजन, अद्रक, पीपली और दालचीनी — ये सब दीपक-पाचन और रक्तसंचार वृद्घि में अत्यंत उपयोगी हैं।
  • अश्वगंधा और नागकेशर चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ दें।
  • महारास्नादि क्वाथ या बलारिष्ट जैसी आयुर्वेदिक दवाएं निर्बलता और ठंडक में सहायक हैं।

4. आधुनिक चिकित्सा विकल्प

  • Intravenous fluids (IV ग्लूकोज़ या इलेक्ट्रोलाइट) — शरीर में ऊर्जा और ताप लौटाने के लिए।
  • Oxygen therapy — जब सांस बहुत कमजोर हो।
  • Cardiac stimulants जैसे Atropine, Dopamine या Dobutamine — केवल अस्पताल सेटअप में।

अर्थात अब किसी “इंजेक्शन” को घरेलू आपात चिकित्सा के रूप में प्रयोग करना सुरक्षित नहीं है। बेहतर होगा कि प्राथमिक सहायता देकर मरीज को निकटतम चिकित्सा केंद्र तक पहुँचाया जाए।

ग्रामीण व देसी दृष्टि से समाधान

  • शरीर को गर्म कपड़ों या सूखे सिकाई से गर्म करना।
  • मदरसुंगी, अद्रक रस, नागकेसर, तुलसी पत्ता और गोंद का काढ़ा।
  • गाय का घी या सरसों तेल की गरम मालिश — इससे रक्तसंचार तेज़ होता है।
  • चाय में काली मिर्च और इलायची डालकर देना चेतना और गर्मी लौटाता है।

निष्कर्ष

कोरामिन अब इतिहास बन चुकी दवा है — लेकिन इंसान की प्राथमिक ज़रूरत आज भी वही है: आपात स्थिति में जीवन बचाने का समय मिलना। फर्क सिर्फ इतना है कि आज हमारे पास अधिक सुरक्षित, वैज्ञानिक और प्राकृतिक विकल्प हैं। ग्रामीण बुद्धिमत्ता और आधुनिक चिकित्सा का संतुलन बनाकर हम बिना कोरामिन के भी वही लक्ष्य पा सकते हैं — “शरीर में गर्मी लौटाना, जीवन बचाना।”